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July 25, 2025
पित्त दोष आयुर्वेद के तीन मुख्य दोषों में से एक है, जो शरीर में अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। जब यह असंतुलित होता है, तो इससे त्वचा में जलन, दाग-धब्बे, मुंहासे और बालों की समस्याएं जैसे झड़ना व जल्दी सफेद होना शुरू हो सकते हैं। इस ब्लॉग में जानें कि पित्त दोष क्या है, इसके लक्षण क्या हैं, और इसे संतुलित रखने के आयुर्वेदिक उपाय क्या हैं।
आयुर्वेद के अनुसार शरीर तीन दोषों से बना होता है – वात, पित्त और कफ।
पित्त दोष मुख्यतः अग्नि (Fire) और जल (Water) तत्वों से बना होता है। यह शरीर में पाचन शक्ति, तापमान, भूख, पसीना और बुद्धि को नियंत्रित करता है।
नींद की कमी
जब पित्त दोष बढ़ जाता है, तो शरीर में गर्मी बढ़ती है और त्वचा पर नज़र आते हैं ये लक्षण:
✅ मुंहासे और दाने
✅ त्वचा की जलन या लालिमा
✅ चेहरे पर तेलीयता बढ़ना
✅ झाइयां और झुलसी हुई त्वचा
✅ एलर्जी और इन्फ्लेमेशन
बालों की जड़ों में भी पित्त दोष असंतुलन का असर दिखता है:
❌ समय से पहले सफेद बाल
❌ अत्यधिक बाल झड़ना
❌ स्कैल्प में जलन
❌ डैंड्रफ या ऑयली स्कैल्प
तेज धूप और अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचें